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Krihna bhav ke amrit ka vikas kis prakar hota hai? कृष्‍ण भाव के अमृत का विकास किस प्रकार होता है? How does the nectar of Krishna Bhava develop?

    कृष्‍ण भाव का अमृत प्रत्‍येक जीवात्‍मा के हृदय में पहले से ही विद्यमान है। किन्‍तु हम अपने भौतिक बद्ध जीवन के कारण इसका विस्‍मरण कर चुके हैं। हरे कृष्‍ण महामन्त्र अर्थात्-- हरे कृष्‍ण , हरे कृष्‍ण , कृष्‍ण कृष्‍ण , हरे हरे। हरे राम , हरे राम , राम राम , हरे हरे-- का कीर्तन पहले से ही हमारे हृदय में विद्यमान कृष्‍ण भाव का अमृत को जाग्रत कर देता है। उदाहरणार्थ , कुछ मास पूर्व इन अमेरिकन एवं युरोपियन युवकों तथा युवतियों को श्रीकृष्‍ण के विषय में कुछ भी पता तक नहीं था , परन्‍तु कल ही हम लोगों ने देखा कि ये लोग रथयात्रा महोत्‍सव में किस प्रकार हरे कृष्‍ण कीर्तन के साथ भावपूर्ण नृत्‍य कर रहे थे। क्‍या आप सोचती हैं कि वह सब कृत्रिम था ? जी नहीं। कृत्रिम भाव से कोई भी लगातार घण्‍टों तक कीर्तन एवं नृत्‍य नहीं कर सकता। एक प्रमाणिक विधि का पालन करके इन लोगों ने वास्‍तव में अपने कृष्‍ण भाव के अमृत को जाग्रत कर लिया है। इसको श्रीचैतन्‍य-चरितामृत में समझाया गया है।             नित्‍य सिद्ध कृष्‍ण प्रेम ' साध्‍य ' कभु नय। श्रवणादि-शुद्ध-चित्ते क...

कृष्‍णभावनामृत क्‍या है?:-what is Krishna bhavanamrit?

 कृष्‍णभावनामृत क्‍या है?:-what is Krishna bhavanamrit?                                                               'कृष्‍ण' का अर्थ है भगवान्। हम सभी का भगवान् के साथ घनिष्‍ठ संबन्‍ध है, क्‍योंकि वे हमारे मूल पिता हैं। परन्‍तु हमें इस संबन्‍ध का विस्‍मरण हो गया है। जब हमारी रूचि यह जानने में हो जाती है कि ''भगवान् के साथ मेरा क्‍या सम्‍बन्‍ध है? जीवन का लक्ष्‍य क्‍या है?'' तब हमें कृष्‍णभावनाभावित कहा जाता है। 'Krishna' means God. We all have a close relationship with the Lord, because He is our original father. But we have forgotten this relation. When we are interested in knowing that "What is my relation with God?" What is the goal of life?” Then we are called Krishna conscious.

आत्‍मा के विज्ञान की शिक्षा (Education in the science of the SOUL)

  प्रथम:-  मानव जीवन का लक्ष्‍य (FIRST GOAL OF HUMAN LIFE)